IIFCL

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उचित आचार संहिता

उचित आचार संहिता

इंडिया इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर फाईनैन्‍स कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) को कंपनीज अधिनियम 1956 के तहत 05 जनवरी 2006 को पूर्णत: सरकार के स्‍वामित्‍वाधीन कंपनी के रूप में निगमित किया गया था। आईआईएफसीएल एक इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर क्षेत्र का वित्‍तीय संस्‍थान तथा गैर बैंकिंग वित्‍तीय कंपनी इस अभ्रिप्राय से समर्प‍ित है कि देश की इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर परियोजनाओं के विकास एवं वित्‍त पोषण में प्रमुख भूमिका निभाए। कंपनी की अधिकृत पूंजी 5000 करोड़ रूपये है, जो कि चुकता पूंजी है और वर्तमान में यह 3900 करोड़ रूपये है। इसके साथ ही, कंपनी का संसाधन जूटाने का कार्यक्रम, अपेक्षानुसार सर्वश्रेष्‍ठ समर्थन है।

वर्तमान में कंपनी, इंडिया इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड नामक विशेष प्रयोजन माध्‍यम(सिफ्टी- SIFTI) से अर्थक्षम अवसंरचना(इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर)परियोजनाओं को वित्‍त पोषण प्रदान करती है।सिफ्टी(SIFTI) के अधीनकंपनी वर्तमान में निम्‍न माध्‍यमों से वित्‍त पोषण प्रदान करती है:

  1. पात्र परियोजनाओं को सीधे ऋण देना
  2. टेक आउट वित्‍त योजना
  3. गौण कर्ज
  4. पांच वर्ष या इससे अधिक की अवधि हेतु बैंकों तथा वित्‍तीय संस्‍थानों को पुनर्वित्‍त
  5. भारत सरकार के द्वारा अनुमोदित कोई अन्‍य प्रविधि

आईआईएफसीएल ने अपने ऋण प्रचालन हेतु भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा निर्देशों के अनुसार एक उचित आचार संहिता विकसित की है, जिसका अभिप्राय सभी ऋण कर्ताओं को यह आश्‍वस्‍त कराना है कि कंपनी के अपने सभी कारोबारी अंतरणों में उचित लेन-देन एवं पा‍रदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है। इस संहिंता में वर्णित प्रतिबद्धताएं सामान्‍य प्रचालन माहौल में लागू(उपयोज्‍य) हैं। संहिता उस तारीख से ही लागू होगी जिस दिन आईआईएफसीएल की वेबसाइट पर डाली गई थी। यह संहिता आईआईएफसीएल पर किसी अधिकार या उत्‍तर‍दायित्‍व निर्मित करने हेतु एक कानूनी दस्‍तावेज का रूप नहीं ले सकता। तदनुसार, यह उचित आचार संहिता निम्‍नानुसर अधिग्रहीत की गई है यथा भारतीय रिजर्व बैंक(आरबीआई) के एनबीएफसी(गैर बैंकिंग वित्त कंपनियों) के लिए उचित आचार संहिता पर परिपत्र सं 2009-10/15 DNBS (PD) CC No. 153/03.10.042/2009-10 दिनांकित 01 जुलाई, 2009 तथा संशोधित भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के परिपत्र सं RBI/2015-16/16 DNBR (PD) CC No. 054/03.10.119/2015-16 दिनांकित 01 जुलाई, 2015).के दिशा निर्देश के साथ पुष्टि करती है।

आईआईएफसीएल के द्वारा विकसित उचित आचार स‍ंहिता निम्‍नलिखित क्षेत्रों पर लागू होती है:

  1. ऋणों के लिए आवेदनों एवं उनके प्रक्रमण(प्रोसेसिंग) पर
  2. ऋण संस्‍वीकृति और नियम/शर्तें
  3. नियम एवं शर्तों में बदलाव सहित ऋणों के संवितरण
  4. संवितरण के पश्‍चात पर्यवेक्षण
  5. अन्‍य सामान्‍य प्रावधानादि
  6. शिकायत/ निवारण तंत्र
  7. आवधिक समीक्षा

1. ऋणों एवं उसके प्रक्रमण(प्रोसेसिंग) हेतु आवेदन

  1. आईआईएफसीएल के द्वारा उसके उधारकर्ता के साथ सभी प्रकार के संचार आसानी से सभी उधारकर्ताओं की समझ में आनेवाली भाषा में किया जाता है।
  2. ऋण आवेदनों में उस अवसंरचना(इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर) परियोजना से संबद्ध सभी आवश्‍यक सूचनाएं होंगी जिसके लिए ऋण मांगा जा रहा है। आईआईएफसीएल यह सुनिश्चित करेगा कि एक संसूचित निर्णय लेने के लिए अग्रणी बैंक/ व्‍यवस्‍थापक/ सिंडीकेटर/ उधारकर्ता सारे नियम एवं शर्तों को सार्थक रूप से समझने में सक्षम हों। अग्रणी बैंक/ व्‍यवस्‍थापक /सिंडीकेटर/ उधारकर्ताओं को संसूचित किया जाएगा और ऋण आवेदन अपेक्षित दस्‍तावेजों का संकेत करेंगे, जिन्‍हें आवेदन पत्र के साथ जमा किया जाना है।
  3. परिपूर्ण आवेदन की प्राप्ति को विधिवत अभिज्ञापित किया जाएगा। आवेदन पत्र की ‘सैद्धांतिक रूप में’ स्‍वीकृति एक नई बिजनेस कमेटी के द्वारा शुरूआती जांच के अधीन होगी, तदनुसार जो विस्‍तृत मूल्‍यांकन एवं बोर्ड के अंतिम अनुमोदन का विषय होगी और कमेटी के निर्णय से अग्रणी बैंक/ व्‍यवस्‍थापक /सिंडीकेटर/ उधारकर्ताओं को कमेटी के बैठक के 15 दिनों के भीतर अवगत करा दिया जाएगा।
  4. सामान्‍यतया, वित्‍त पोषण हेतु आवेदनों को बोर्ड के द्वारा प्रस्‍ताव के मंजूरी के 15 दिन की समयावधि के भीतर निपटान किया जाएगा।
  5. ऋण की श्रेणी या परिसीमा की अवसीमा की परवाह किए बिना, यदि ऋण आवेदन अस्‍वीकृत हो जाता है, जो इसकी जानकारी मुख्‍य कारणों सहित लिखित में अवगत कराया जाएगा, जिसके कारण ऋण आवेदन अस्‍वीकृत हुआ है।

2. ऋण संस्‍वीकृति तथा नियम/शर्तें

  1. आईआईएफसीएल उधारकर्ता को लिखित में आशय पत्र अथवा अन्‍य तरीके से अनुमोदित ऋण की राशि के साथ नियम एवं शर्तों से अवगत कराएगा, जिसमें वार्षिक ब्‍याज दर एवं तदनुसार उपयोजिता की प्रविधि भी शामिल होगी। ऋण अनुबंध(करारनामा) में देरी से भुगतान की अवस्‍था में, दांडिक ब्‍याज प्रभार मोटे काले अक्षरों में उल्लिखित होगा। उधारकर्ता के द्वारा इन नियम एवं शर्तों की स्‍वीकार्यता कंपनी की फाईल में रखा जाएगा।
  2. ब्‍याज एवं अन्‍य प्रभारों के निर्धारण हेतु उपयुक्‍त आंतरिक सिद्धांत एवं प्रक्रियाएं को वर्णित किया जाएगा और बिजनेस (कारबार) आवश्‍यकताओं, विनियामक एवं उपभोक्‍ता संवेदनाओं, बाजार-व्‍यवहारों आदि को ध्‍यान में रखते हुए समीक्षा की विषयवस्‍तु होगा।
  3. ऋण के दस्‍तावेज की प्रतियां सभी प्रासांगिक अनुलग्‍नकों की प्रतियों के साथ उधारकर्ता को ऋण संवितरण के समय उपलब्‍ध कराया जाएगा। मानक आशय पत्र में अनुमोदन के अनुरोध, अस्‍वीकृतियां आदि शामिल होंगी। आईआईएफसीएल किसी उपयुक्‍त समीक्षा/मूल्‍यांकन, उसकी अपनी आंतरिक नीतियों के अनुपालनों, सिफटी/टेक आउट वित्‍त योजना/पुनर्वित्‍त योजना तथा ऋणदाताओं के संकाय के अंतिम निर्णय के बिना किसी वृद्धि/ अतिरिक्‍त परिसीमा/ सुविधाओं के विचार के लिए किसी कानूनी वाध्‍यता से आबद्ध नहीं होगा।
  4. कंपनी प्रासांगिक घटकों- यथा निधियों की लागत, लाभांश, जोखिम प्रीमियम तथा बाजारी प्रतियोगिताऔर ऋणों एवं अग्रिमों में प्रभारित किए जानेवाली ब्‍याज दरों के निर्धारण हेतु एक ब्‍याज दर माडल को अधिगृहीत करेगी। ब्‍याज की दर तथा जोखिम के श्रेणीकरण हेतु उपागम एवं विभिन्‍न श्रेणी के उधारकर्ताओं से भिन्‍न ब्‍याजदर के प्रभार हेतु औचित्‍यीकरण उधारकर्ता या उपभोक्‍ता को प्रकट किया जाएगा और संस्‍वीकृति पत्र में सुस्‍पष्‍टता के साथ बताया जाएगा। इसके साथ ही कंपनी की वेबसाइट पर ब्‍याज की दरें एवं जोखिम के श्रेणीकरण के लिए उपागम को उपलब्‍ध कराया जाएगा। वेबसाइट में प्रकाशित सूचनाएं या अन्‍य तरीके से प्रकाशित सूचनाएं, जब कभी भी परिव‍र्तित हों, ब्‍याज दरों के प्रभार के बदलावों को अद्यतित किया जाना चाहिए।

3. नियम एवं शर्तों में बदलाव सहित ऋण का संवितरण

  1. संस्‍वीकृत ऋणों का संवितरण अग्रणी बैंक से ऋण पुष्टि सूचना की पावती पर, परियोजना की प्रगति की स्थिति तथा संवितरण पूर्व शर्तों/ संदर्शित एलसीएन के समय लागू शर्तों के अनुपालन की पुष्टि के बाद सभी निर्देशों के अनुपालन के तुरंत पश्‍चात किया जाएगा।
  2. ऋणों के सभी संवितरण केवल उधारकर्ता के निलंब खाता के माध्‍यम से किया जाएंगे।
  3. ऋण दातासंकाय(कंसोरटियम) की बैठक में लिए गए किसी भी‍ निर्णय के आधार पर नियम एवं शर्तों में किसी भी प्रकार के बदलाव, ब्‍याज दर तथा अन्‍य प्रभारों/ अधिभारों में आए बदलावों को उधारकर्ताओं को, यदि खाता वैशिष्‍ट बदलाव हैं, वैयक्तिक रूप से संसूचित किया जाएगा और यदि अन्‍य प्रकार के हैं जो सार्वजनिक सूचना/ आईआईएफसीएल की वेबसाइट में समय समय पर प्रदर्शन के द्वारा सूचित किया जाएगा।
  4. ब्‍याजदर तथा प्रभार/अधिभार में बदलाव पूर्व व्‍यापी और प्रत्‍याशित प्रभाव डालेगा जो इस बात पर निभर करेगा कि ऋण दातासहयाता संघ/ संकाय(कंसोरटियम) की बैठक में उधारकर्ता की उपस्थिति के दौरान निर्णय लिए गए और तदनुसार सूचना प्राप्‍त हुई। इस संदर्भ में अनुकूल प्रावधान यही होगा कि इसे ऋण करारनामें(अनुबंध) में उल्लिखित किया जाए।
  5. ऐसे किसी भी बदलावों के निष्‍पत्ति हेतु संपूरक विलेख/ दस्‍तावेज या अपेक्षित लिखा पढी को क्रियान्वित किया जाए और इसकी सूचना भी दी जाएगी। इसके अलावा, सुविधा की उपलब्‍धता ऐसे विलेख/दस्‍तावेज या लिखा पढी के क्रियान्‍वयन की विषयवस्‍तु होगी।

4. संवितरण पश्‍च पर्यवेक्षण

  1. संवितरण पश्‍च पर्यवेक्षण इस दृष्टिकोण को ध्‍यान में रखते हुए रचनात्‍मक होगा कि उधारकर्ता किन्‍हीं वास्‍तविक कठिनाईयों से सामना कर सकता है।
  2. अनुबंध के तहत भुगतान अनुस्‍मरण/गति बढाने या निष्‍पादकता अथवा अतिरिक्‍त प्रतिभूतियां मांगने के बारे में निर्णय लेने से पहले आईआईएफसीएल अनुबंधानुसार उधारकर्ता को तर्कसंगत सूचना प्रदान करेगा।
  3. कंपनी ऋण की पूरी और अंतिम भुगतान की प्राप्ति के बाद ऋण से संबंधित सभी प्रतिभूतियों को निर्मुक्‍त करेगी, बशर्ते कि उधारकर्ता कंपनी को संतुष्‍ट करता हो, जो कि उधारकर्ता के खिलाफ आईआईएफसीएल की ओर से किसी भी प्रकार के बकाए/ वैधानिक दायित्‍व /अधिकार शेष हो सकते हैं। यदि ऐसे किसी भी अधिकार को कार्यान्वित किया जाता है, तो उधारकर्ताओं को अपे‍क्षित विवरण के साथ यथोचित एवं उपयुक्‍त सूचना दी जाएगी।

5. अन्‍य सामान्‍य प्रावधान

  1. कंपनी उधारकर्ता के मामलों में दखलदांजी करने से दूर रहेगी, सिवाय ऋण अनुबंध में उल्लिखित नियम एवं शर्तों में निहित उद्देश्‍यों के उल्‍लंघन(जबतक कि अग्रणी बैंक/सिंडीकेटर/ व्‍यवस्‍थापक/ उधारकर्ता के द्वारा पहले न बताई गई जानकारी) कंपनी के संज्ञान में आती है। हालांकि, आईआईएफसीएल के वसूली के अधिकारों तथा कानून के दायरे में प्रतिभूति के प्रवर्तन के साथ साथ यथापेक्षित नामित निदेशकों की नियुक्ति, जो इस प्रतिबद्धता से प्रभावित है, इन बातों पर लागू नहीं होती है।
  2. उधारकर्ता के खाते के स्‍थानांतरण केलिए उधारकर्ता से प्राप्‍त अनुरोध पावती के मामले में, सहमति या अन्‍य पकार से अर्थात् कंपनी की आपत्ति, यदि कोई है, सामान्‍य तौर पर अग्रणी बैंक/ सिंडीकेटर/व्‍यवस्‍थापक/ उधारकर्ता को किसी भी अनुरोध की पावती के 21 दिनों की अवधि के भीतर सूचना देनी होगी। ऐसे कोई भी स्‍थानांतरण अनुबंध की शर्तों के अनुसार यथा कानून सम्‍मत पारदर्शी होंगे।
  3. कंपनी की संग्रह नीति विनम्रता, उचित व्‍यवहार एवं दृढ़विश्‍वास पर आधारित होगी।
  4. ऋण की वसूली के मामले में, कंपनी किसी भी प्रकार के उत्‍पीड़न- जैसे कि विषम समय पर उधारकर्ताओं को लगातार परेशान करना, ऋणों की वसूली के लिए बाहुबल का उपयोग आदि नहीं करेगी।
  5. आईआईएफसीएल अपनी ऋण नीतियों एवं क्रियाकलापों में किसी भी व्‍यक्ति के साथ लिंग, जाति, धर्म अथवा क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा।
  6. कंपनी यह सुनिश्चित करेगी कि कर्मचारी ग्राहकों के साथ यथोचित तरीके से बर्ताव करें।

6. शिकायत/परिवाद निवारण तंत्र

  1. शिकायत निवारण हेतु, आवेदक विनिर्दिष्‍ट वरिष्‍ठ अधिकारी को लिख सकता है जिसके विवरण नीचे दिए गए हैं। इस आवेदन में आवश्‍यक दस्‍तावेजों के साथ, यदि कोई हैं, शिकायत/परिवाद की प्रकृति का स्‍पष्‍ट उल्‍लेख होना चाहिए । उपरोक्‍त शिकायत के आवेदन पत्र की एक प्रति आवेदक को पावती तिथि के वापस दी जाएगी।
  2. विर्निष्‍ट अधिकारी इस शिकायत/परिवाद पर तुरंत आवश्‍यक कार्रवाई करते हुए प्रयास करेगा कि कथित शिकायत का शीघ्र समाधान हो।
  3. संपर्क करने हेतु विनिर्दिष्‍ट अधिकारी के विवरण
    नाम एवं पदनाम :
    टेलीफोन नंबर :
    ई-मेल आई डी :
    श्री राजीव कुमार गुप्ता ( उप महाप्रबंधक )
    011-24662636
    RAJEEV .GUPTA@IIFCL.IN
  4. यदि कोई शिकायत/विवाद एक माह की अवधि में निवारित नहीं होती है तो उपभोक्‍ता भारतीय रिजर्व बैंक के प्रभारी अधिकारी: श्री एस.एस. प्रधान, महाप्रबंधक, गैर-बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग (डीएनबीएस), भारतीय रिजर्व बैंक, 6 संसद मार्ग, नई दिल्‍ली- 110001 के पास अपील कर सकता है।
    टेलीफ़ोन: 011 23714456
  5. कंपनी अपने पंजीकृत कार्यालय/ वेब-साइट में शिकायत निवारण तंत्र को प्रदर्शित करेगी।

7. आवधिक समीक्षा

  1. कंपनी विभिन्‍न पणधारकों के सूचनार्थ अपनी उपरोक्‍त उचित आचार संहिता को अपनी वेबसाईट डालेगी। इसके साथ ही कंपनी इस बारे में समय समय पर आरबीआई के द्वारा जारी नवीन दिशा-निर्देशों के साथ साथ वार्षिक आधार पर इस संहिता की वार्षिक आधार पर समीक्षा एवं संशोधन करेगी। कंपनी अपनी संहिता के अनुपालनार्थ आवधिक समीक्षाओं तथा शिकायत निवारण तंत्र की कार्यप्रणाली से अवगत कराएगी। उपभोक्‍ताओं की बेहतर सेवा हेतु किसी भी प्रकार के सुझावों को कंपनी व्‍यापक महत्‍व देती है।
  2. नियमित अंतराल पर ऐसी समीक्षाओं की एक समेकित रिपोर्ट बोर्ड में प्रस्‍तुत की जा सकती है।